Tej Patta in Hindi |Benefits Of Bay Leafs in Hindi |तेजपात के हैं अद्भुत फायदे

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Tej Patta in Hindi Benefits Of Bay Leafs
Tej Patta in Hindi | Benefits Of Bay Leafs in Hindi

Tej Patta in Hindi: तमाल वृक्ष के पत्तों को तमालपत्र, तेजपात या तेजपता कहते हैं। तेजपत्ता हमेशा हरा रहने वाले पेड़ के पत्ते हैं । तेजपत्ता मसाले के रूप मेँ बहुतायत में काम लेते हैं। यह सिक्किम, हिमालय, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में पैदा होते है। तेजपत्ता पेड़ से तोडकर धूप में सुखाकर पंसारी की दुकानों पर बेचे जाते हैं।

Tej Patta in Hindi | Benefits Of Bay Leafs in Hindi

तेजपत्ता में दर्दनाशक एंटी-आक्सीडेंट (Anti-oxidant) गुण है।  तेजपत्ता मधुर, कुछ उष्ण, चिकना, तैलीय होता है । वात, कफ नाशक और पाचक होता है ।

मधुमेह (Diabetes)

(1) तेजपत्ता को पीसकर बहुत बारीक चूर्ण बना लें इसकी एक चम्मच नित्य तीन बार पानी से फांकी लेने से मधुमेह के रोगी को शीघ्र लाभ होता है। रक्तशर्करा (Blood sugar) शीघ्र घट जाती है।

(2) रात को एक चम्मच तेजपत्ता पाउडर एक कांच के गिलास में डालकर तीन-चौथाई गिलास पानी से भरकर  चम्मच से अच्छी तरह हिलाये और ढक कर रख दें। सवेरे उस गिलास के पानी पर जैली जैसी परत जमी हुई दिखेगी। पानी पर जमी इस परत को चम्मच से निकाल का फेंक दें और पानी को कपडे से छानकर पिये। इसके बाद आधा घंटा कुछ नही खाएं। रात को सोते समय आधा चम्मच पिसी हल्दी एक कप पानी में घोलकर पिये। इसके बाद ठण्डा पानी या दूध नहीं पिये। इस प्रयोग से मधुमेह (diabetes) ठीक दो जाता है। यह प्रयोग लम्बे समय तक करते रहे। मधुमेह नियंत्रण में रहेगा।

स्मरण शक्तिवर्धक (Mnemonic)

तेजपत्ता मस्तक पोषक है। तेजपत्ता एसिटिल्कोलाइनैस्टेरै (Acetylcholinesterase) नामक खतरनाक एंजाइम के उत्पादन को रोकता है, जो मस्तिष्क के संदेश वाहक हार्मोन एसिटिल्कोलाइन (Acetylcholine) को तोडने का काम करता है। तेजपात को नित्य खाए जाने वाले भोजन में शामिल करें । इससे स्मरणशक्ति बढ़ेगी और ‘अल्जाइमर्स’ (‘Alzheimer’s’) बीमारी पर नियंत्रण होगा।

बाँझपन, गर्भस्त्राव की चिकित्सा (Sterility, miscarriage therapy)

कभी-कभी किसी स्त्री को गर्भाधान (Conception) ही नही होता। बाँझपन (Sterility) की समस्या का सामना करना पडता है । किसी को गर्भ ठहरने के पश्चात् गर्भस्राव (Miscarriage) हो जाता है। तेजपत्ता दोनों ही समस्याओं को दूर करता है । तेजपत्ता का पाउडर चौथाई चम्मच तीन बार पानी से नित्य फांकी लें । कुछ महीने तेजपात की फाकीं लेने से गर्भाशय (Uterus) की शिथिलता दूर होकर गर्भाधान हो जाता है । जिन स्त्रियों को गर्भस्त्राव (Miscarriage) होता हो, वे गर्भवती होने के बाद इसी प्रकार तेजपात पाउडर की फांकी कुछ महीने लें । इस प्रकार तेजपत्ता से गर्भ सम्बन्धी दोष दूर होकर स्त्री माँ बन जाती है ।

स्तनवर्धक (Breastfeeding)

तेजपत्ता पाउडर की फांकी लेने से जिन स्त्रियों के स्तन बहुत छोटे-पतले होते हैं, उनके स्तनों का आकार बढकर मोटा हो जाता है । तेजपत्ता का तेल किसी अन्य तेल में मिलाकर मालिश भी करें ।

जुकाम, खाँसी (Cold, cough)

तेजपत्ता कफजन्य रोगों को ठीक करता है । चौथाई चम्मच तेजपात पाउडर की गर्म पानी से नित्य तीन बार फांकी लेने से सर्दी-जुकाम और खांसी ठीक हो जाती है ।

तेजपत्ता और छोटी पीपल समान मात्रा में पीसकर आधा चम्मच चूर्ण को एक चम्मच शहद में मिलाकर तीन बार चाटने से खाँसी ठीक हो जाती है ।

जोडों का दर्द, मूत्रल, ज्वराध्न (Joint pain, diuretics, sorghum)

तेजपत्ता (Tej Patta in Hindi) के चार पत्ते एक गिलास पानी में उबालें। उबलते हुए पानी आधा रहने पर छानकर नित्य तीन बार पियेँ । इससे पेशाब अधिक आता

है, ज्वर या बुखार पसीना आकर उतर जाता है तथा पुन: ज्वर नहीं आता, बढता । बदन का दर्द ठीक हो जाता है ।

सिरदर्द (Headache)

सर्दी या गर्मी में किसी भी कारण से सिरदर्द हो, तो तेजपत्ता डंठल सहित पीसकर हल्का गर्म करके ललाट पर लेप कर दें । दर्द मिट जायेगा ।

रक्तपित्त (Blood bile)

मुँह, नाक, मल, मूत्र किसी भी रास्ते से रक्त निकलने पर एक गिलास ठण्डे पानी में एक चम्मच पिसा हुआ तेजपत्ता मिलाकर हर तीन घण्टे बाद पिलाने से रक्तस्राव बन्द हो जाता है।

दांतों की सफाई (cleaning of teeth)

सूखे तेज-पत्तों को बारीक पीसकर हर तीसरे दिन एक बार मज्जन करें। इससे दाँत चमकने लगते है।

सर्दी से शरीर में दर्द, नाक में सुरसुराहट, छींके आना, पानी गिरना, सिर में भारीपन, जलन, गला बैठना, तालू छिलना आदि होने पर 10 ग्राम तेजपात कूटकर तवे पर सेंककर रख लें। इसका 1 भाग, 2 कप पानी, स्वादानुसार दूध, चीनी मिलाकर चाय की तरह उबालकर, छानकर नित्य 3 बार पीने से सर्दी जनित रोग ठीक हो जाते हैँ ।

अपश्ये सतिगतार्थ स्यातीमौषधा निवेषणां’ जो लोग आहार-विहार के नियमों का पालन करते है, उनको दवाओं की आवश्यकता ही नहीं पडती । वे घर में ही उपलब्ध दालचीनी, तेजपात आदि के प्रयोगों से स्वस्थ हो जाते हैं ।

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