निरोगी जीवन के लिए पानी से संबन्धित महत्वपूर्ण नियम

पानी पीने के कुछ सरल नियमो को अपनाकर स्वस्थ जीवन शैली का आनन्द लिया जा सकता है।

निरोगी जीवन के लिए पानी से संबन्धित महत्वपूर्ण नियम

निरोगी जीवन के लिए पानी से संबन्धित महत्वपूर्ण नियम

 

पानी पीने के कुछ सरल नियमो को अपनाकर स्वस्थ जीवन शैली का आनन्द लिया जा सकता है।आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए तीन चीजों का नियंत्रित होना जरूरी है। इन्हे त्रिदोष कहा जाता है। ये तीनों है वात, पित्त और कफ। निरोगी जीवन के लिए इन तीनों दोषो का नियंत्रण मे होना अति आवश्यक है। इनमे मे से किसी भी एक के बढ्ने पर शरीर मे रोग उत्पन्न होते है। हमारे शरीर मे होने वाले विभिन्न छोटे तथा बड़े रोग वात, पित्त तथा कफ के असंतुलन के परिणाम स्वरूप होते है।

आयुर्वेद मे इन तीनों दोषो के संतुलन हेतु कई सरल नियम बताए गये है जिनमे मे से पानी से संबन्धित कुछ का वर्णन इस लेख मे किया जाएगा।

  • भोजन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। आयुर्वेद मे कहा गया है की ‘’ भोजनान्ते विषम वारि’’ जिसका अर्थ है की भोजन के अंत पानी पीना विष पीने के समान है। परंतु हममे से अधिकांश लोगो की यह आदत होती है की भोजन करने के दौरान तथा भोजन के ठीक पश्चात हम खूब सारा पानी पी लेते है।

            जब हम भोजन करते है तो वह हमारे मुख तथा आहारनली मे से होते हुए एक स्थान पर कुछ समय के लिए एकत्रित होता है। इस स्थान को आमाशय कहते है और संस्कृत मे इसे ‘’ जठर’’  कहा जाता है।

            जिस प्रकार खाना बनाने के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है, आयुर्वेद के अनुसार उसी प्रकार भोजन को पचाने के लिए आमाशय या जठर मे भी अदृश्य अग्नि उत्पन्न होती है। इसे  ‘’जठराग्नि’’ कहा जाता है। इसी अग्नि से हमारा ग्रहण किया हुआ भोजन सही ठंग से पचता है और उसके बाद इस पचे हुए भोजन से हमे शरीर हेतु आवश्यक तत्व प्राप्त होते है। यदि हम  भोजन के ठीक बाद या भोजन करते समय बीच मे पानी पीते है तो खाना पचाने के लिए पैदा हुई अग्नि मंद पड़ती है और खाना अच्छी तरह से पच नहीं पाता है और वह उसी स्थान पर सड़ने  लगता है तथा विष के समान हो जाता है। यही आगे चलकर कई प्रकार की बीमारियो को जन्म देता है।इसीलिए कहा गया है   ‘’ भोजनान्ते  विषम  वारि’’

             अतः आयुर्वेद मे यह कहा गया है की भोजन हमेशा बैठकर धीरे धीरे चबा कर करना चाहिए जिससे की वह सीधे अमाशय मे जा सके। यदि पानी पीना हो तो खाने के आधा घंटे पहले पिया  जा सकता है। भोजन के समय पानी नहीं पीना चाहिए।यदि प्यास लगे या भोजन अटकता है  तो छांछ य मट्ठा लिया जा सकता है या फिर किसी मौसमी फल का रस पिया जा सकता है।

             भोजन करने के कम से कम एक घंटे बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए। मुँह मे से भोजन का स्वाद मिटाने के लिए भोजन के अन्त मे छाछ या दही या फलो का रस पिया जा सकता है।

  • पानी जब भी पिये तो हमेशा आराम से घूंट-घूंट कर के पीना चाहिए जैसे की हम गर्म चाय य दूध पीते है। एक एक घूंट करके पानी पीने से हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी मुह की लार पेट मे जाती है। कभी भी एक बार मे गटगट करके पानी नहीं पीना चाहिए। हमारे मुह की लार की प्रकृति क्षारिय होती है और हमारे पेट मे हमेशा अम्ल बनता रहता है। तो घूंट घूंट करके पानी पीने से पर्याप्त मात्रा मे क्षारीय लार पेट मे जाकर अम्ल से मिलती है तथा अम्ल के प्रभाव को(acidity) कम करती है। पेट मे अम्लता कम होने से रक्त मे अम्लता कम होती है तथा रक्त शुद्ध होता है।
  • हमे पानी हमेशा सामान्य तापमान वाला या गुनगुना ही पीना चाहिए। ज्यादा ठंडा पानी स्वस्थ के लिए नुकसान दायक होता है। कितनी भी प्यास लगने पर ठंडा, बर्फ डाला हुआ या फ्रिज मे रखा हुआ पानी नहीं पीना चाहिए। हमारे शरीर की तासीर गर्म होती है तथा ठंडा पानी पीने से पेट परस्पर विरोधी गतिविधि होती है जो नुकसान दायक होती है। गर्मी के दिनो मिट्टी के घड़े का पानी पिया जा सकता है।

 

  • सुबह उठने के बाद सबसे पहले 2-3 गिलास पानी पीना चाहिए। आँख खुलने के समय सुबह-सुबह पानी पीने से मुह की लार पेट मे जाती है तथा अम्लीयता को कम करती है। सुबह मुंह में बनी हुई यह लार पाचन क्रिया को  मज़बूत बनाती है। यह पानी पेट मे जाकर बड़ी आंत को साफ करता है जिससे कब्ज की शिकायत नहीं होती।

 

  • भोजन करने के बाद, फल जैसे ककड़ी, खीरा, तरबूज, खरबूजा, मसालेदार, तला हुआ भोजन , मूंगफली, गर्म दूध व चाय और धूप से आने के तुरंत बाद पानी पीना भी सेहत के लिए हानिकारक है। एक्सरसाइज करने के तुरंत बाद भी पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि इस दौरान शरीर का तापमान बदलता है।