नीम के फायदे, उपयोग और नुकसान – Neem Benefits, Uses and Side Effects in hindi

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neem of benefits in hindi
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प्रकृति ने ऐसे तो हमे बहुत कुछ प्रदान किया है जिसमे एक बहुत ही अच्छी औषधि के तौर पर नीम दिया है जो पर्यावरण के लिए जितना ही लाभदायक है, उतना ही स्वास्थ्य के लिए बहुत ही बेहतर माना जाता है। मनुष्य या जीव-जंतु के शरीर से जुड़ी कई छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए नीम के पत्तों से लेकर इसकी छाल का उपयोग कई सदियों से किया जा रहा है। भारत में लगभग 4 सौ वर्ष से नीम का उपयोग किया जरा है। नीम के भोत ही लाभदायक पेड़ है।

नीम क्या है?-what is Azadirachta indica

नीम वृक्ष (अज़ाडिराछ इंडिका) एक सदाबहार पेड़ मन जाता है जो महोगनी परिवारसे संबंध रखता है। इसका वानस्पतिक नाम अजादिरछा इंडिका (Azadirachta Indica) है। नीम के पेड़ का जीवनकाल चक्र 150-200 साल तक का हो सकता है। भारत के आल्वा भी कई देशों में नीम के पेड़ के लगभग हर अंग को पारंपरिक चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

अनुमान लगाने पर यह पता लगा है कि भारत में लगभग 18 लाख नीम के पेड़ पाए जाते है। भारतीय आयुर्वेद में नीम एक महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। इसका उपयोग त्वचा संबंधी समस्याओं से लेकर मधुमेह और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के इलाज में किया जा सकता है।

नीम के लाभ- Benefits of Neem in hindi

मौखिक स्वास्थ्य


नीम के अर्क में मजबूत एंटीसेप्टिक यौगिक मिश्रण होता है जो की बैक्टीरिया को नष्ट करने में सहायता करता है जिससे गुहा, मुंह से दुर्गंध कम हो सकता है। नीम की शक्तिशाली जीवाणुरोधी गतिविधि इससे टूथपेस्ट, माउथवैश और मौखिक स्वास्थ्य टॉनिक में एक बहुत ही प्रसिद्ध अवयव बनाने में सहायता मिलती है


त्वचा के लिए

नीम का तेल सूखी त्वचा से छुटकारा दिलाने में मदद करता है और खुजली, लाल, कुपित त्वचा को कम करने में मदद करता है। आयुर्वेद के सूत्रों व् अध्ययन में, नीम तेल आमतौर पर छालरोग और एक्जिमा के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। नीम के तेल में एंटीऑक्सिडेंट्स का उच्च मात्रा में होता हैं, जो सूर्य, पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों और अन्य हानिकारक कारकों से अधिक जोखिम के कारण होने वाले मुक्त कण से त्वचा देख रेख और बचाव में मदद करते हैं।

सूजन के लिए

पारंपरिक भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा ने गठिया दर्द और सूजन को कम करने और रोग की प्रगति को रोकने के लिए नीम पत्ते, बीज और छाल के जैसे अंगो का उपयोग किया जाता है।


मलेरिया के लिए

मलेरिया के प्रभाव और इसके लक्षणों को कम और बचाव करने में नीम के लाभ देखे जा सकते हैं। दरअसल, नीम की पत्तियां एंटीमलेरियल गुणों (Antimalarial Properties) की मात्रा से भरपूर होती हैं, जो मलेरिया की दवा के रूप में कार्य भी करती है और लाभदायक मानी जाती है और इस समस्या से सामना करने में मदद कर सकती हैं।

नीम का उपयोग – How to Use Neem

नीम के पत्तों का लेप का उपयोग फेस मास्क के रूप में किया जाता है जो त्वचा को कोमल रखता है।
ब्लड प्यूरीफायर के रूप में आधे कप पानी में आधा चम्मच नीम की पत्तियों को पीस कर उसके रस मिलाकर लेने से किया जाता है।घाव पर नीम की पत्तियों का लेप बना कर लगाया जा सकता है।

नीम की कितनी मात्रा का इस्तेमाल करना चाहिए, यह व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य के ऊपर निर्भर करता है। इस संबंध में अभी कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत और सूत्र नहीं मिले है। इसलिए, डॉक्टर की सलाह पर ही इसका उपयोग करे।

नीम के दुष्प्रभाव – Neem Ke side effect in Hindi

नीम में मौजूद पदार्थ शिशुओं में रय सिंड्रोम के लक्षण पैदा करने के लिए पाए जाते हैं। जो की बच्चे के शरीर पर दुष प्रभाव दाल सकते है।आयुर्वेद विशेषज्ञ थकान से पीड़ित लोगों को नीम के उपयोग न करने और उसे बचने कि सलाह देते हैं, क्योंकि इसमें बीमारी की गंभीरता बढ़ने के मौके बढ़ जाते है।

बच्चों में नीम के तेल का सेवन उल्टी, अधिक नींद और श्वसन संबंधी लक्षणों और बीमारियों का कारण बन सकता है। नीम के तेल का टॉक्सिक प्रभाव डायरिया और मतली जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए अगर बीमारी ज्यादा होने लग जाये तो डॉक्टर की सलाह आवश्य ले।

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