Chandragupta Maurya Biography, Facts, History | चन्द्रगुप्त मौर्य की जीवनी

Chandragupta Maurya Biography, History: सम्राट Chandragupta महान थे। उन्हें Chandragupta महान कहा जाता है। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चन्द्रगुप्त भारत के बहुत अच्छे शासक माने जाते है, जिन्होंने बहुत सालों तक शासन किया.

Chandragupta Maurya Biography, Facts, History | चन्द्रगुप्त मौर्य की जीवनी

चन्द्रगुप्त मौर्य (Chandragupta Maurya) एक ऐसे शासक थे जो पुरे भारत को एकिकृत करने में सफल रहे थे, उन्होंने अपने अकेले के दम पर पुरे भारत पर शासन किया. Alexander के काल में हुए Chandragupta ने Alexander के सेनापति Seleucus को दो बार बंधक बनाकर छोड़ दिया था। सम्राट Chandragupta maurya के गुरु Chanakya थे। Chandragupta Maurya ने अपने पुत्र Bindusar को गद्दी सौंप दी थीं। बिंदुसार के समय में Chanakya उनके प्रधानमंत्री थे। इतिहास में Bindusar को 'महान पिता का पुत्र और महान पुत्र का पिता' कहा जाता है, क्योंकि वे Chandragupta maurya के पुत्र और सम्राट Ashok महान के पिता थे।

मान्यता है कि बचपन में ही इस प्रतिभावान बालक पर कौटिल्य नामक ब्राह्मण की दृष्टि पड़ी | वह इसे Takshshila ले गया और वही इसकी शिक्षा दीक्षा हुयी | एक मत यह भी है कि Chandragupta Maurya सिकन्दर के आक्रमण के समय पंजाब में उससे मिला था | उसकी स्पष्टवादिता से खीझकर जब सिकन्दर ने उसे बंदी बनाने का प्रयत्न किया तो Chandragupta Maurya उसके चंगुल से निकल भागा |इसके बाद ही इसकी Kautilya से भेंट हुयी जो मगध नरेश से अपमानित होकर उसे उखाड़ने के लिए प्रतिज्ञाबद्ध था.

Chandragupta Maurya History and Jeevan Parichay in Hindi

  जीवन परिचय बिंदु   चन्द्रगुप्त जीवन परिचय
  पूरा नाम   चन्द्रगुप्त मौर्य
  जन्म   340 BC
  जन्म स्थान   पाटलीपुत्र , बिहार
  माता-पिता   नंदा, मुरा
  पत्नी   दुर्धरा
  बेटे   बिंदुसार - अशोका, सुसीम, विताशोका (पोते)

Chanakya या कौटिल्य की सहायता से Chandragupta Maurya ने विशाल सेना संघठित की | इस बीच Alexander भारत से लौट चूका था और उसकी मृत्यु हो गयी थी | Chandragupta ने स्थिति का लाभ उठाकर पंजाब से यूनानी सत्ता समाप्त कर दी | उसने मगध के नन्द वंश को समाप्त किया | Malwa, Gujarat और Saurashtra पर विजय प्राप्त करके नर्मदा तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया | Alexander की मृत्यु के बाद उसका सेनापति Seleucus पूर्वी यूनानी साम्राज्य का अधिपति बन बैठा |

उसने Chandragupta Maurya को चुनौती दी पर उसे युद्ध में मुंह की खानी पड़ी और Kabul, Herat, Kandahar और Baluchistan के प्रदेश देने के साथ साथ अपनी पुत्री हेलेना का Chandragupta Maurya से विवाह करके संधि करनी पड़ी | 303 ईस्वी पूर्व में हुयी यह संधि चन्द्रगुप्त की सबसे बड़ी उपलब्धि थी | उसने मगध के सिंहासन पर कब्जा किया , Seleucus का घमंड मिटाया , यूनानियो को पंजाब और सिंध से भगाया और पुरे उत्तर भारत में एक सुदृढ़ राज्य की स्थापना की |

इसी का परिणाम था कि अगले सौ वर्षो तक फिर यूनानियो ने भारत की ओर मुंह नही किया | Seleucus ने चन्द्रगुप्त के दरबार में Megasthenes नामक दूत रखा था | उसकी रचित पुस्तक “Indica” से और Chanakya अथवा कौटिल्य के “Economics” से उस समय की व्यवस्थित शासन व्यवस्था का पता चलता है | उसका लगभग 24 वर्षो का कार्यकाल साम्राज्य विस्तार में ही बीता | जैन परम्परा के अनुसार अपने अंतिम दिनों में अपने पुत्र बिन्दुसार को गद्दी सौंपकर Chandragupta Maurya ने जैन धर्म ग्रहण कर लिया था | वह स्वामी Bhadrabahu के साथ Shravanabelagol चला गया और वही उपवास करके शरीर त्याग दिया.

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